दिवाली की तैयारी घर की सफ़ाई से शुरू होती है, दीयों से आगे बढ़ती है, और अक्सर पूरी होती है जब स्पीकर पर कोई पुराना बॉलीवुड गाना बज उठता है और पूरा घर उसी माहौल में डूब जाता है। हर त्योहार का अपना एक साउंडट्रैक होता है, और दिवाली भी इससे अलग नहीं। दिलचस्प बात ये है कि बॉलीवुड में सीधे तौर पर "दिवाली गाने" की कैटेगरी बहुत बड़ी नहीं है — ज़्यादातर फ़िल्मों में दिवाली को सिर्फ एक सीन की तरह दिखाया गया, गाना उस सीन के मूड से जुड़ा होता है, ख़ुशी, रोशनी, नई शुरुआत। लेकिन कुछ गाने ऐसे हैं जो दिवाली के मौके पर लगभग हर घर, हर रेडियो स्टेशन पर बज ही जाते हैं। ## जो गाने असल में "दिवाली गाने" बन गए "मुझ पे इल्ज़ाम-ए-बेवफ़ाई है" जैसे गाने भले ही दिवाली पर न बने हों, लेकिन कुछ ख़ास गाने वाकई इस त्योहार के लिए ही बनाए गए थे। "फ़िल्म हम आपके हैं कौन" का "दीदी तेरा देवर दीवाना" भले ही शादी का गाना है, लेकिन इसका उत्सव वाला माहौल दिवाली की पार्टियों में भी उतना ही फ़िट बैठता है। पुराने दौर में "पड़ोसन" और उस जैसी फ़िल्मों के त्योहारी गाने आज भी सुने जाते हैं, जिनमें रोशनी, मिठाई, और पूरे परिवार के इकट्ठा होने का जश्न झलकता है। वहीं ज़्यादा हाल के दौर में "गोलमाल" सीरीज़ और कई फ़ैमिली ड्रामा फ़िल्मों में दिवाली के सीन के साथ जो गाने आए, वो भी काफ़ी लोकप्रिय हुए — क्योंकि उनमें वही गर्मजोशी और मस्ती है जो असली दिवाली की शाम में होती है। ## लता-आशा के ज़माने का त्योहारी माहौल पुराने दौर के कई क्लासिक गाने, भले ही सीधे दिवाली पर न बने हों, त्योहारों के मौके पर आज भी उतने ही सुने जाते हैं। "ये रात ये चांदनी फिर कहां" जैसे गाने की मासूम खुशी, या "सजन रे झूठ मत बोलो" की सादगी — ये सब उस भावना से जुड़ते हैं जो त्योहार के मौके पर घर में होती है। ## नए दौर के गाने भी अपनी जगह बना रहे हैं पिछले कुछ सालों में कई नई फ़िल्मों ने भी त्योहारी माहौल वाले गाने दिए हैं, जो धीरे-धीरे दिवाली की पार्टियों का हिस्सा बनते जा रहे हैं। आजकल के संगीतकार पुराने ढोल-ताशे वाले अंदाज़ को इलेक्ट्रॉनिक बीट्स के साथ मिलाकर एक नया साउंड बना रहे हैं, जो युवा पीढ़ी को भी उतना ही पसंद आता है जितना बड़े-बुज़ुर्गों को पुराने गाने पसंद आते हैं। यही वजह है कि आजकल दिवाली की पार्टियों की प्लेलिस्ट में पुराने और नए गाने साथ-साथ बजते नज़र आते हैं — एक पीढ़ी "ये रात ये चांदनी फिर कहां" पर झूमती है, तो दूसरी किसी हालिया गाने पर। घर में बड़ों के साथ बैठकर पुराने गाने सुनना और बच्चों के साथ नए गाने पर नाचना — यही असल में दिवाली की सबसे खूबसूरत तस्वीर है, और रेडियो इस पूरी तस्वीर को एक साथ जोड़ने का काम करता है। ## रेडियो और त्योहार का रिश्ता Radio Hotstar पर दिवाली के हफ़्ते में हमारा शेड्यूल थोड़ा अलग हो जाता है — हम कोशिश करते हैं कि दिन भर ऐसे गाने चलें जो त्योहार के मूड से मेल खाएं। RJ अमन और RJ वंशिका दोनों अपने शो में श्रोताओं से उनकी दिवाली की यादें भी पूछते हैं, और अक्सर लोग बताते हैं कि कौन सा गाना उनके बचपन की दिवाली से जुड़ा है। यही रेडियो की सबसे खूबसूरत बात है — एक गाना बजता है, और हज़ारों लोग एक ही पल में उस गाने के साथ अपनी-अपनी दिवाली की यादों में खो जाते हैं। चाहे वो गाना 90 के दशक का हो या हाल का, अगर वो त्योहार के जज़्बे से जुड़ता है, तो वो हर साल दोबारा उतना ही अपना लगता है। इस दिवाली, अगर आपके पास भी कोई खास गाना है जो आपको त्योहार की याद दिलाता है, तो हमें ज़रूर बताइए — हम उसे आपके शो में शामिल करने की पूरी कोशिश करेंगे।