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Bihar News
12 May 2026, 05:40 AM
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पटना में 56km का लंबा दूसरा मरीन ड्राइव:4 एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा, 50 लाख लोगों को सीधा फायदा, दूसरे पिकनिक स्पॉट पर जानें क्या-क्या होगा
बिहार सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक ने राजधानी पटना और उत्तर बिहार के भविष्य की एक नई पटकथा लिख दी है। जिस तरह पटना के दक्षिणी हिस्से में बने मरीन ड्राइव (जेपी गंगा पथ) ने शहर की सूरत बदल दी, अब वैसा ही एक शानदार 56 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेस-वे गंगा के उत्तरी हिस्से यानी बिदुपुर से दिघवारा तक बनने जा रहा है।
इसे पटना का दूसरा मरीन ड्राइव कहा जा रहा है। यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि उत्तर बिहार की किस्मत बदलने वाला एक्सप्रेसवे साबित होगा।
भास्कर स्पेशल रिपोर्ट में जानते हैं इस प्रोजेक्ट के बारे में...
मरीन ड्राइव से भी भव्य होगा उत्तरी गंगा पथ
पटना का मौजूदा जेपी गंगा पथ 20.5 किमी लंबा है, लेकिन नया प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे इससे ढाई गुना अधिक लंबा 56 किमी का होगा।
यह पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर बनाया जाएगा और इसके लिए डीपीआर बनाने की
मंजूरी मिल गई है।
• उत्तरी पथ पर कुछ घाट बनाए जाएंगे। जहां से गंगा नदी का विशाल और मनोरम दृश्य दिखाई देगा।
• अभी दक्षिणी हिस्से में बने मरीन ड्राइव पर रात के समय जब पूरी सड़क और दीघा-सोनपुर पुल की लाइटें जलती हैं, तो यह नजारा बिल्कुल अंतरराष्ट्रीय स्तर का लगता है। कुछ ऐसा नजारा ही उत्तरी गंगा पथ के किनारे भी होगा।
• यहां खाने-पीने के शौकीनों के लिए काफी कुछ होगा। छोटे-छोटे स्टाल लगाए जाएंगे।
• युवाओं और पर्यटकों के लिए यहां कई बेहतरीन सेल्फी पॉइंट्स बनाए जाएंगे।
• लोग यहां सुबह और शाम की सैर और साइकलिंग के लिए आ सकते हैं।
4 एक्सप्रेस-वे पुल से जुड़ेगा कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन ब्रिज से शुरुआत होगी। (बिदुपुर)
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात है कि इसे ऊंचे बांध (EMBANKMENT) पर बनाया जाएगा।
• यह सड़क एक मजबूत बांध की तरह काम करेगी, जिससे हर साल बाढ़ की चपेट में आने वाले करीब 50 लाख लोगों को बचाएगी।
• सड़क का लेवल बाढ़ के अधिकतम स्तर से भी ऊंचा रखा जाएगा, ताकि आपदा के समय भी सड़क संपर्क बना रहे।
• एक्सप्रेसवे बनाने के लिए होने वाले सर्वे में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि कम से कम आबादी प्रभावित हो और सरकार को कम जमीन अधिग्रहण करने की जरूरत पड़े।
आस्था और टूरिज्म को होगा फायदा
यह एक्सप्रेस-वे बिहार के गौरवशाली इतिहास और धार्मिक पर्यटन को भी एक-दूसरे से जोड़ेगा।
• लोकतंत्र की जननी और भगवान महावीर व बुद्ध की तपोभूमि वैशाली को पटना से सीधा और तेज रास्ता
• सरकार हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर) को काशी विश्वनाथ की तर्ज पर विकसित कर रही है। एक्सप्रेस-वे सीधे श्रद्धालुओं को यहां तक पहुंचाएगा।
• दिघवारा के पास स्थित अंबिका भवानी (आमी) शक्तिपीठ तक पहुंचना अब और भी आसान हो जाएगा।
अर्थव्यवस्था और 'सेटेलाइट सिटी' का सपना हो साकार
इस एक्सप्रेसवे से सिर्फ सफर छोटा नहीं होगा, बल्कि व्यापार के नए द्वार खुलेंगे।
• सरकार की योजना सेटेलाइट सिटी और इंडस्ट्रियल जोन बनाने की है। इस एक्सप्रेसवे से फायदा होगा।
• उत्तर बिहार से आने वाला ट्रैफिक सीधे डायवर्ट हो जाएगा, जिससे पटना शहर की सड़कों पर दबाव कम होगा।
• सोनपुर (147 गांव) और छपरा (78 गांव) में बनने वाली नई टाउनशिप को इस एक्सप्रेस-वे से सीधा लाभ मिलेगा।
बिदुपुर से दिघवारा तक का यह कॉरिडोर तैयार होने के बाद पटना, हाजीपुर और सोनपुर 'सिस्टर सिटी' के रूप में उभरेंगे। गंगा के दक्षिणी किनारे की खूबसूरती अब उत्तरी किनारे पर भी दिखाई देगी, जिससे पर्यटन, कृषि और व्यापार को एक नई रफ्तार मिलेगी।
कितना खर्चा होगा
अभी इस महापरियोजना का सर्वे अंतिम चरण में है। सर्वे पूरा होने के बाद ही पुलों की संख्या, मिट्टी की जांच और वन भूमि के आकलन के आधार पर सटीक लागत तय होगी। यह बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) की देखरेख में बनेगा।
एक्सटेंड हो रहा पटना मरीन ड्राइव
फिलहाल पटना में अभी 20 किमी लंबा मरीन ड्राइव (जेपी गंगा पथ) है। इसका एक्सटेंशन कोइलवर तक किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत दीघा से कोइलवर के बीच 36 किमी लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।
• इसके बन जाने के बाद पटना से कोइलवर जाने में लगने वाला डेढ़ से दो घंटे का समय घटकर अब मात्र 30 मिनट रह जाएगा। विकसित की जा रही ये सड़क न केवल पटना के शहरी जाम को खत्म करेगी, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के जिलों के बीच व्यापारिक और सामाजिक संपर्क को एक नई ऊंचाई देगी।
• 6500 करोड़ रुपए से इसका निर्माण हाइब्रिड एनयूटी मॉडल पर किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक बिहार की पहली ऐसी परियोजना है। इस मॉडल के तहत निर्माण एजेंसी को अगले 15 वर्षों तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।
• 36 किमी लंबी इस सड़क का 18 किमी हिस्सा एलिवेटेड (जमीन से ऊपर) होगा और बाकी 18 किमी हिस्सा मिट्टी के बांध (एटग्रेड) पर होगा।
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